एकादशी के दिन चावल खाना क्यों होता है वर्जित, जानें इसका धार्मिक कारण

WRITTEN BY Akhil Singhal2023-01-18,17:42:54 news

भगवान विष्णु को समर्पित होता है यह दिन

हर महीने दो एकादशी की तिथि पड़ती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान होता है।

व्रत और पूजा करने का विधान

इस तिथि को लेकर मान्यता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति सच्चे मन में भगवान श्रीहरी की पूजा करता है। उसके सभी कष्ट, समस्याएं दूर होती है। जीवन में सुखों की प्राप्ति होती है।

भगवान विष्णु होते है प्रसन्न

माना जाता है कि इस दिन श्री नारायण की पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते है और अपने भक्तों पर कृपा भी करते है।

चावल खाना होता है वर्जित

एकादशी के दिन कई नियम भी होते है। इन नियमों में एक नियम इस दिन चावलयक सेवन न करने से भी जुड़ा हुआ है।

इसके पीछे है यह कहानी

पौराणिक कथा के अनुसार, एकादशी के दिन ही महर्षि मेधा ने मां शक्ति के क्रोध से बचने के लिए धरती में अपने शरीर का त्याग कर दिया था। इस दौरान उनके कुछ अंश धरती में समा गए थे।

इस वजह से नहीं खाये जाते चावल

बाद में उनकी उत्पत्ति चावल और जौ के रूप में हुई। जन्म लेने के कारण इन्हें जीव के रूप में माना जाता है। जिस कारण एकादशी के दिन इनका सेवन करना महर्षि मेधा के खून और रक्त का सेवन करने के बराबर है।

इससे जुड़ा है वैज्ञानिक तथ्य

एकादशी के दिन चावल न खाने का वैज्ञानिक तथ्य भी है। जिसका संबंध जल और चंद्रमा से जुड़ा हुआ है।

मान्यता; इस योनि में मिलता है जन्म

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन चावल खाने से अगला जन्म रेंगने वाले जीव के रूप में मिलता है।

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