Maha Shivratri 2021: महाकाल से लेकर सोमनाथ तक भगवान के दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, देखें वीडियो

Publish Date: 26 Mar, 2021
Maha Shivratri 2021: महाकाल से लेकर सोमनाथ तक भगवान के दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, देखें वीडियो

Mahakal- ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में आज महाशिवरात्रि के मौके पर उल्लास छाया हुआ है। आज सुबह भगवान का अभिषेक करने के बाद सुबह 5 बजे से ही यहां दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया है। श्रद्धालु यहां सुबह 10 बजे तक भगवान के दर्शन कर सकते हैं। यहां करीब 1 लाख भक्तों के आने का अनुमान है। रात के 11 बजे से भगवान महाकाल का महाअभिषेक होगा। इस दौरान दूध, दही, खंडसारी, शहद, घी, पांच प्रकार के फलों का रस, गन्ने का रस, गंगाजल, गुलाब जल, भांग इत्यादि चीजों के साथ केसर मिले हुए दूध से भगवान का अभिषेक किया जाएगा।

\r\n\r\n

mahakal video

\r\n\r\n

Baba Baidyanath- बाबा बैद्यनाथ धाम एक मंदिर परिसर है जिसमें बाबा बैद्यनाथ का मंदिर है। यहां पर ज्योतिर्लिंग स्थापित है, और 21 अन्य मंदिर भी हैं। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, राक्षस राजा रावण ने वरदान प्राप्त करने के लिए मंदिर के वर्तमान स्थल पर शिव की पूजा की थी। जिसके बाद उन्होंने दुनिया में कहर बरपाया था। रावण ने बलि के रूप में शिव को एक के बाद एक अपने दस सिर चढ़ाएं थे। इससे प्रसन्न होकर, शिव घायल हुए रावण का इलाज करने के लिए उतरे थे। जैसा कि उन्होंने एक वैद्य के रूप में काम किया, उन्हें वैद्य भी कहा जाता है। शिव के इस पहलू की वजह से ही इस मंदिर का नाम ये पड़ा। कांवड़ यात्रा शिव के भक्तों का एक वार्षिक तीर्थ है, जिसे गंगा नदी के पवित्र जल को लाने के लिए बिहार के सुल्तानगंज के हिंदू तीर्थ स्थानों में कांवरियों के रूप में जाना जाता है। लाखों प्रतिभागी गंगा से पवित्र जल लेकर आते हैं और इसे झारखंड के बैद्यनाथ मंदिर में प्रसाद के रूप में अर्पित करने के लिए सैकड़ों मील दूर का सफर तय करके ले जाते हैं।

\r\n\r\n

baba baidyanath video

\r\n\r\n

Somnath- Gujarat प्रांत के काठियावाड़ इलाके में समुद्र के किनारे सोमनाथ नाम का विश्वप्रसिद्ध मंदिर है। जहां 12 ज्योतिर्लिंगों से एक स्थापित है। सोमनाथ-ज्योतिर्लिंग की महिमा के बारे में महाभारत, श्रीमद्भागवत तथा स्कंद पुराणादि में विस्तार से बताया गया है। चन्द्रदेव को सोम भी कहा जाता है। उन्होंने भोलेनाथ को ही अपना नाथ-स्वामी मानकर यहां तपस्या की थी इसी वजह से इसका नाम 'सोमनाथ' पड़ा था। ऐसा कहा जाता है कि सोमनाथ के मंदिर में शिवलिंग पहले हवा में स्थित था। ये एक कौतुहल का विषय बन गया था। जानकारों के मुताबिक यह वास्तुकला का एक नायाब नमूना था। शिवलिंग चुंबक की शक्ति की वजह से हवा में ही स्थित था। ऐसा कहा जाता कि महमूद गजनबी इसे देखकर हतप्रभ रह गया था।

\r\n\r\n

 

Related Videos

यह भी पढ़ें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept