Diwali 2022: माता लक्ष्मी की पूजा के साथ गणेश भगवान की पूजा का है विशेष महत्व, जानें कथा

Publish Date: 24 Oct, 2022
Diwali 2022: माता लक्ष्मी की पूजा के साथ गणेश भगवान की पूजा का है विशेष महत्व, जानें कथा

Diwali 2022: हिंदू धर्म में दिवाली सबसे प्रमुख त्यौहार माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्री राम भगवान माता सीता और अपने छोटे भाई लक्ष्मण के साथ 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। जिसके बाद अयोध्यावासियों ने उनके आगमन की खुशी दीपक जलाकर मनाई थी। वहीं, दिवाली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन किये जाने का विधान है। जिसकी वजह यह है कि माता लक्ष्मी धन,वैभव और समृद्धि का प्रतीक है। हालांकि, यहां एक सवाल उठता है कि माता लक्ष्मी की पूजा के साथ भगवान गणेश की पूजा क्यों होती है?

गजानन की पूजा के बिना पूजा मानी जाती है अधूरी 

तो बता दें कि भगवान गणेश प्रथम देवता के रूप में पूजे जाते हैं। भगवान गजानन की पूजा किये बिना कोई भी पूजा का फल नहीं मिलता। हालांकि, दिवाली के दिन की जाने वाली पूजा की प्रमुख वजह गणेश भगवान का माता लक्ष्मी का दत्तक पुत्र होना है। वैसे तो गणेश भगवान की मां पार्वती है, लेकिन लक्ष्मी माता ने भी उन्हें अपना दत्तक पुत्र माना हुआ है। इस दत्तक पुत्र के रिश्ते को लेकर एक बहुत ही प्रचलित कथा प्रसिद्ध भी है। 

पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार लक्ष्मी जी को अपने आप पर बहुत ज्यादा अभिमान हो गया था। जिसके पीछे की वजह यह थी कि सारा जगत माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए हमेशा ललायित रहता था   और माता का अपने निवासस्थान में निवास करने को लेकर पूजा भी करता था। 

माता लक्ष्मी की इस बात को भगवान विष्णु जी ने भांप लिया था। जिस कारण श्री हरि ने मां लक्ष्मी का घमण्ड व अहंकार तोड़ने के लिए कहा कि भले ही सारा संसार मां लक्ष्मी की पूजा करता है और सभी उन्हें पाने के लिए व्याकुल रहता है। लेकिन उन्हें फिर भी एक बहुत बड़ी कमी है। वो अभी तक अपूर्ण हैं। श्री हरी की इस बात को सुनकर मां लक्ष्मी ने अपनी यह कमी जाननी चाही। जिसके बाद भगवान विष्णु जी ने उनसे कहा कि जब तक कोई स्त्री मां नहीं बनती है, तब वह पूर्ण नहीं होती है, अर्थात ऐसे में वो अपूर्ण हैं।

श्री हरी की यह बात जानकर मां लक्ष्मी बहुत व्याकुल हो गईं और उन्हें संतान नहीं होने का बहुत दुख हुआ। इसके बाद उन्होंने अपनी सखी माता पार्वती को सारी बात बताते हुए माता पार्वती से कहा कि उनके दो पुत्रों में से वे एक पुत्र मां लक्ष्मी को गोद दे दें। मां लक्ष्मी की पीड़ा को दूर करने के लिए माता पार्वती ने उनकी यह बात मान ली और अपने छोटे पुत्र गणेश को माता लक्ष्मी को दे दिया। तभी से गणेश जी माता लक्ष्मी के दत्तक-पुत्र माने जाने लगे।

गणेश भगवान को पुत्र रूप में पाकर मां लक्ष्मी बहुत प्रसन्न हुई और उन्होंने गणेश जी को यह वरदान दिया कि जो भी मां लक्ष्मी की पूजा के साथ गणेश की पूजा नहीं करेगा, तो मैं उसके पास नहीं रहूंगी। जिसके बाद से दिवाली के इस समृद्धि वाले  त्योहार पर मां लक्ष्मी के साथ हमेशा ही उनके दत्तक पुत्र गणेश जी की पूजा की जाती है। 

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