Kanwar Yatra 2022: जुलाई महीने की इस तारीख से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा, जानें कांवड़ के महत्वपूर्ण नियम

Publish Date: 21 Jun, 2022
Dainik Jagran Kanwar Yatra 2022: जुलाई महीने की इस तारीख से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा, जानें कांवड़ के महत्वपूर्ण नियम

Sawan Kanwar Yatra 2022: हर साल जब भी सावन महीने की शुरुआत होती है, तो पूरा देश भगवान भोले की भक्ति में रंगा हुआ नजर आता है। दरअसल, सावन महीने में लाखों-करोडों शिवभक्त अपने इष्ट भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर या वाहनों के जरिये गंगा नदी से जल भरकर शिव मंदिर पहुंचते हैं। ख़ास बात तो यह है कि कावड़ियों के पैर में पड़े छालों और दर्द के बाद भी भगवान भोले के प्रति उनकी निष्ठां और आस्था उन्हें जल चढ़ाने से रुकने नहीं देती।

 

अगले महीने देशभर में फिर गूजेंगा हर हर भोले 

वहीं, इस साल अगले महीने की 14 तारीख (14 जुलाई) से सावन महीने की शुरुआत हो रही है, ऐसे में एक बार फिर देशभर में लाखों कावड़ियां हर साल की तरह भोलेनाथ को जल चढ़ाते हुए नजर आयेंगे। हिंदू धर्म में कांवड़ यात्रा का आरंभिक समय से ही विशेष महत्व रहा है और इस जलाभिषेक से जुड़ी ऐसी कई कथाएं भी प्रचलित है, जिन्हें आपने भी कई बार सुनी होगी।

इन कथाओं में एक कथा सबसे ज्यादा प्रचलित है, जिसके अनुसार भगवान शंकर के भक्त भगवान परशुराम ने बागपत स्थित पूरा महादेव मन्दिर में भगवान भोले को जल चढ़ाया था। मान्यता है कि भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए भगवान परशुराम गढ़मुक्तेश्वर से गंगाजल लाए थे।

 

नियमों का पालन करना है बेहद जरूरी 

दूसरी ओर, अगर आप भी इस बार कांवड़ लाने और भगवान भोलेनाथ को जलाभिषेक करने की सोच रहे है, तो आपको यह जानना बेहद ही जरूरी है कि  कांवड़ ले जाते समय कुछ न‌ियमों का पालन करना बहुत जरूरी होता हैं, इन नियमों का पालन करके ही जलाभिषेक को सम्पूर्ण माना जाता है।

 

कांवड़ यात्रा के कुछ महत्वपूर्ण नियम (Kanwar Yatra some Importants Rules)

  • यदि कोई व्यक्ति कांवड़ यात्रा शुरू कर लेता है या जलाभिषेक करने के लिए निकल लेता है, तो इसके बाद कांवड़ियों के लिए किसी भी प्रकार का नशा करना वर्जित होता है।

  • कांवड़ के दौरान, किसी भी व्यक्ति को मांस,मदिरा और तामसिक भोजन आदि का सेवन नही करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से कांवड़ सम्पूर्ण नही होती और फल भी नही मिलता।

  • कांवड़ यात्रा को लेकर यह भी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति भगवान भोले जो जलाभिषेक करना चाहता है, उसे पैदल चलकर ही अपनी कांवड़ यात्रा को पूरा करना चाहिये, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कथाओं में भी पैदल चलकर जलाभिषेक का वर्णन किया गया है और इसे ही कांवड़ का सही विधान बताया गया है। हालांकि, अब लोग समय के अभाव के चलते बाइक, ट्रक या फिर किसी दूसरे साधनों का इस्तेमाल करने लगे हैं।

  • कांवड़ यात्रा में शुद्धता बहुत जरूरी है। इसलिए बिना स्नान किए कावड़ को हाथ नहीं लगाना चाहिए। अगर आप ऐसा करते है, तो वह कावड़ अशुद्ध मणि जाती है।

  • इसके साथ ही कांवड़ का एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि जो भी कांवड़िया जल भरने के बाद किसी कारणवश बीच रास्ते में रुकता है, तो उसे गंगाजल भरे कांवड़ को कभी भी नीचे जमीन पर नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से वह जल खंडित माना जाता है। हालांकि, आप इसे किसी ऊंचे स्थान पर या स्टैंड पर रख सकते है।

  • धार्मिक मान्यतों के अनुसार कावड़ को अपने सिर के ऊपर से लेकर जाना भी वर्जित माना गया है। इसलिए आपने भी देखा होगा कि कावड़िये हमेशा अपनी कावड़ को कंधे पर रखकर चलते है।

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