छत्तीसगढ़ में है छोटा तिब्बत, अनूठी है मैनपाट की संस्कृति और परंपरा

Publish Date: 01 Oct, 2019
 

ताजी-जाती हवा के झोंकों के साथ बांहे फैलाकर अहसास करें तो यहां जमीन से आसमान का मिलन होता महसूस होता है. रंग-बिरंगे छोटे बड़े झंडे से सुसज्जित परिसर, हाथ में माला और चेहरे पर मुस्कान. यह पहचान है मैनपाट (Mainpat) के तिब्बती (Tibetan) और उनके कैंपों (Camps) की. यहां तिब्बतियों की बड़ी आबादी (Tibetan population), उनकी सभ्यता संस्कृति (Culture), रहन-सहन और परंपरा (tradition) विकसित हो चुकी है. इसके साथ ही यहां के स्थानीय बासिंदों पर भी दोनों परंपराओं का खासा असर देखने को मिलता है। बाहर से आने वाले सैलानी इसी अनोखी परंपरा से प्रभावित होते हैं। मैनपाट आने के बाद तिब्बती शरणार्थियों (tibetan refugees)  की जीवन शैली हर किसी को आकर्षित करती है।तिब्बत से आने के बाद भी समाज के लोग अपनी मूल संस्कृति और सभ्यता से दूर नहीं हुए हैं. मैनपाट के मूल निवासियों को आय उपार्जक गतिविधियों से जोड़ने में भी तिब्बती शरणार्थियों ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। तिब्बती शरणार्थियों के संपर्क में आकर ही यहां के मूल निवासियों ने व्यापार की दिशा में कदम बढ़ाया था.

 

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