Maha Shivratri 2022: महाशिवरात्रि पर इन Top 3 मंदिरों में पूजा करने से होती है सभी मनोकामना पूरी, इस मन्दिर पर भगवान भोले पर चढ़ाई जाती है सिगरेट

Publish Date: 28 Feb, 2022
jagrantv.com Maha Shivratri 2022: महाशिवरात्रि पर इन Top 3 मंदिरों में पूजा करने से होती है सभी मनोकामना पूरी, इस मन्दिर पर भगवान भोले पर चढ़ाई जाती है सिगरेट
Maha Shivratri 2022: हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा अराधना का विशेष महत्व है। मान्यता है भगवान शिव बहुत ही दयालु और कृपालु भगवान हैं। वो मात्र एक लोटा जल चढ़ाने से भी प्रसन्न हो जाते हैं। हर महीने आने वाली मासिक शिवरात्रि के साथ-साथ साल में पड़ने वाली महाशिवरात्रि का भी खास महत्व है। महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम दिन माना जाता है। महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन मनाई जाती है। महाशिवरात्रि का व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, जो भी इस व्रत को करता है उसके सभी कष्ट और संकट दूर होते है, भय से मुक्ति मिलती है और शिव कृपा से आरोग्य की प्राप्ति होती है और सुख सौभाग्य बढ़ता है।
 

भगवान शिव के 108 नाम है और हर नाम का अपना महत्व है:

शिव अनादि, आदि, मध्य और अनंत है। शिव आरंभ है और शिव ही अंत है। शिव समस्त ब्रह्मांड है। देवों के साथ-साथ असुर, दानव, राक्षस और पिचास भी भगवान शिव की आराधना करते हैं। वो रावण को भी वरदान देते हैं और राम को भी। शंकरा, सोमेश्वरा, आशुतोष, भैरव, भोलेनाथ, महेश्वर चंद्रमा को आभूषण की तरह धारण करने वाले भगवान शिव के 1 नहीं 108 नाम है और हर नाम का अपना महत्व है।
 
 

इन 3 मन्दिरों में महाशिवरात्रि मनाई जाती है धूमधाम से:

 
वही शिवरात्रि के दिन भारत के सभी मंदिरों में बहुत ही धूमधाम से यह त्योहार मनाया जाता है। बता दें कि भारत के विश्व प्रसिद्ध मंदिरों में शिवरात्रि के दिन अलग-अलग तरह से यह पावन पर्व मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि भारत के तीन ऐसे मंदिरों के बारे में जहां शिवरात्रि पर भगवान भोले की पूजा कुछ अनोखे तरह से होती है और उन मंदिर की विशेष कहानी और मान्यता आखिर क्या है?
 

1.पुरा महादेव मंदिर

पुरा गांव के श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर की ख्याति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। हर साल कईं राज्यों के  लाखों कांवडिये श्रद्धालु भगवान भोले को शिवरात्रि के दिन जल चढ़ने यहां पहुंचते हैं। इसे प्राचीन सिद्धपीठ भी माना जाता है। पुरामहादेव में शिवलिंग को भगवान परशुराम ने स्थापित किया था। मान्यता है कि इस मन्दिर में सबसे पहले भगवान परशुराम ने जल चढ़ाया था। 

जिसके बाद से हर साल यहाँ उत्तर प्रदेश , बिहार , दिल्ली और अन्य राज्यों से आए कांवडिये जल चढ़ने पहुंचते है। इस मंदिर में श्रद्धालु बड़ी आस्था-भाव के साथ आते हैं। श्रद्धालुओं की मनोकामना को पूरा करने वाले भगवान भोलेनाथ अपने सभी भक्तों को सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

  

2. लुटरू महादेव का मंदिर

हिमाचल प्रदेश के अर्की सोलन जिले में स्थित लुटरू महादेव के मंदिर पर महशिवरात्रि को भक्तों की भीड़ लगती है। यहां मांगी गई मन्नत पूरी होती है, ये ही विश्वास यहां भक्तों का अंबार लेकर आता है। ये मंदिर एक गुफा के अंदर बना हुआ है। इसके अंदर बिल्कुल बीच में 8 इंच का एक शिवलिंग है। ये एक प्राकृतिक शिवलिंग है, जिसकी लोग पूजा करते हैं।

बताया जाता है कि इस स्वनिर्मित शिवलिंग में कई छेद हैं। हालांकि किसी को समझ नहीं आता कि शिवलिंग में इतने छेद कैसे हुए? बताया जाता है कि भगवान ने ही इसमें ये छेद किये हैं। इस मंदिर की प्रसिद्धि इन छेदों में भरे जाने वाले भोग की वजह से है। जी हां, इस मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले भक्त इन छेदों में सिगरेट भरते हैं। भगवान भोले को सिगरेट चढाएं जाने के कारण और मन्नत पूरी होने की वजह ही इस मन्दिर की लोकप्रियता है। शिवरात्रि के दिन यहाँ भक्तों की लम्बी लम्बी कतारे लगती है।

 

3. विरुपाक्ष महादेव मंदिर

रतलाम से करीब 30 किमी दूर बिलपांक ग्राम है। जिसकी मुख्य सड़क से पूर्व की ओर करीब 2 किमी अंदर विरुपाक्ष महादेव का प्राचीन मंदिर है।  शिवरात्रि के दिन यहाँ हजारों श्रद्धालु भगवान भोले के दर्शन करने आते है। इस दिन यहां महाशिवरात्रि पर मेला लगता है जिसमें देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।इस मन्दिर को भूल भुलैया वाले शिव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। 
 
इस मन्दिर की ऐसी मान्यता है कि बाबा महादेव के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं जाता। सबसे खास बात ये है मंदिर में महाशिवरात्रि पर यहां 5 दिवसीय हवन होता है लेकिन इस हवन की आहुतियों के दौरान हवन कुंड के ठीक ऊपर खीर का प्रसाद को बांधकर लटकाया जाता है। माना जाता है कि  इस हवन की आहुतियों से इस खीर के प्रसाद में भगवान विरुपाक्ष का विशेष आशीर्वाद मिलता है। इस प्रसाद को महाशिवरात्रि के एक दिन बाद वे महिलायें ग्रहण करती हैं, जिन्हें संतान की प्राप्ति नहीं हो पा रही है। माना जाता है कि इस प्रसाद से संतान की मनोकामना पूर्ण होती है।गोद भरने पर यहां बच्चों को मिठाईयों से भी तौला जाता है।

महाशिवरात्रि मनाए जाने का कारण

महाशिवरात्रि से जुड़ी वैसे तो  कई कहानियां हैं मगर तमाम लोगों का मानना है कि इस दिन भगवान शिव और शक्ति का मिलन हुआ था। जबकि दूसरा कारण यह है कि समुद्र मंथन में जो विष निकला था भगवान शिव ने इस तिथि पर ही यह विष धारण किया था।

 

जानिए महाशिवरात्रि 2022 का दिन, तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि:

वैदिक पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि 1 मार्च को मनाई जाएगी, जबकि मंगलवार सुबह 3 :16 बजे से महाशिवरात्रि की शुरु होगी। वहीं चतुर्दशी तिथि का समापन 2 मार्च यानी बुधवार सुबह 10 बजे होगा। 

महाशिवरात्रि के दिन सभी शिव मंदिरों में भक्त अपने भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए पूजा अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे। भगवान सदा शिव ने परम ब्रह्म स्वरूप से साकार रूप धारण किया था।

पूजन का शुभ मुहूर्त 4 पहर में होगा 

महाशिवरात्रि पूजन का शुभ मुहूर्त कई समय पर पड़ रहा है। पहले पहर की पूजा 1 मार्च 2022 शाम 6:21 मिनट से रात 9:27 मिनट तक होगी। इसी के साथ दूसरे पहर की पूजा 1 मार्च की रात 9:27 मिनट से 12: 33 मिनट तो होगी। जबकि तीसरे पहर की पूजा- 1 मार्च रात 12:33 मिनट से सुबह 3:39 मिनट तक होगी। वहीं चौथे पहर की पूजा 2 मार्च- सुबह 3:39 मिनट से 6:45 मिनट तो होगी।

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