Mahalakshmi Vrat 2021 : जानें 16 दिनों तक चलने वाले महालक्ष्मी व्रत के बारे में, महत्व और व्रत कथा

Publish Date: 14 Sep, 2021
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Mahalakshmi Vrat 2021: 


महालक्ष्मी व्रत हिन्दूओं के महत्त्वपूर्ण व्रत में से एक है। महालक्ष्मी व्रत भद्रपद माह के शुक्ल अष्टमी से शुरू होता है। यह व्रत लगातार 16 दिनों तक जारी रहता है। इस दौरान मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है, व्रत रखा जता है। इस व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। मान्यताओं के अनुसार, महालक्ष्मी व्रत को रखने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। यह व्रत राधाष्टमी के दिन किया जाता है। गणेश चतुर्थी के ठीक चार दिन बाद महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत हो जाती है।

 

महालक्ष्मी व्रत कब है? (Mahalakshmi Vrat 2021 Date)

16 दिनों तकचलने वाले इस व्रत को काफी शुभ माना जाता है। इस व्रत में अन्न ग्रहण नहीं किया जाता है। कहा जाता है कि महालक्ष्मी व्रत को विधि-विधान से पूजन करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती होती है।

  • अष्टमी तिथि प्रारंभ: 13 सितंबर 2021 दोपहर 03:10 बजे
  • अष्टमी तिथि समाप्त: 14 सितंबर 2021 दोपहर 01:09 बजे

 

महालक्ष्मी व्रत के चौघड़िया मुहूर्त (Mahalakshmi Vrat shubh muhurat)

  • दिन का चौघड़िया मुहूर्त- 6:05 ए एम
  • रात्रि का चौघड़िया मुहूर्त- 6:29 पी एम
  • अमृत काल- 06:05 ए एम से 07:38 ए एम

 

महालक्ष्मी व्रतकरने का क्या है महत्व? (Significance of Mahalakshmi Vrat)

महालक्ष्मी व्रत से जुड़ी कई कहानियां बताई जाती है। पुराण के अनुसार, पांडवों में सबसे बड़ेयुधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से कौरवों को जुए में खोए हुए धन को वापस लाने के तरीके बताने के लिए कहा। ऐसे में भगवान कृष्ण ने उन्हें महालक्ष्मी व्रत का पालन करने की सलाह दी जो भक्तों को सौभाग्य, धन और समृद्धि का आशीर्वाद देता है।

एक अन्य किंवदंती के अनुसार भगवान शिव ने देवी पार्वती से धन और सौभाग्य के लिए व्रत रखने को कहा था। एक अन्य में देवी लक्ष्मी के सपने में एक महिला, चारुमती के पास जाने का उल्लेख है।  ताकि वह उसे व्रत रखने के लिए कह सके। चारुमती ने अन्य महिलाओं के साथ उपवास किया, और पूरा होने पर, उन्होंने खुद को गहनों और धन से भरे घरों से ढका हुआ पाया। तब से यह व्रत किया जाने लगा।

 

महालक्ष्मी व्रत करने की पूजा विधि (Mahalakshmi Vrat Puja Vidhi)

महालक्ष्मी व्रत प्रक्रिया काफी सरल है। जो लोग 16 दिनों तक उपवास कर सकते हैं वो 3 दिनों (इस अवधि के पहले, आठवें और सोलहवें दिन) के लिए उपवास कर सकते हैं। महालक्ष्मी व्रत करने के लिए भक्त सुबह जल्दी उठें और और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से पहले स्नान कर लें। भक्त सूर्योदय के समय सूर्य देव को आराधना करते हैं।

महालक्ष्मी व्रत में पूजा करने के लिए सबसे पहले देवी की मूर्ति के सामने एक कलश रखा जाता है और उसमें पानी और चावल भरा जाता है, जो समृद्धि का प्रतीक है। फिर कलश को पान और आम के पत्तों से ढककर चावल से भरी थाली में रख दिया जाता है। बायें हाथ में सोलह गांठों वाला धागा धारण करना चाहिए।

पूजा के बाद16 दूर्वा घास को लिया जाता है और एक साथ बांधा जाता है, इसे पूरे शरीर पर छिड़कने के लिए पानी में डुबोया जाता है। महालक्ष्मी पूजा समाप्त करने के लिए भक्त प्रतिदिन महालक्ष्मी व्रत कथा का पाठ किया जाता है। बता दें कि महालक्ष्मी व्रत की अवधि के दौरान शराब का सेवन और मांसाहारी खाना सख्त वर्जित है।

 

 

 

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