कोरबा (छत्तीसगढ़): कोरकोमा गाँव में चार गाँवों की प्यास बुझा रहा है अर्जुन का पेड़

Publish Date: 18 May, 2019
 

कोरबा(छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के कई इलाके पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। वहीं कोरबा के कोरकोमा में अर्जुन का एक पेड़ चार गांवों की प्यास बुझा रहा है। जिला मुख्यालय से 21 किलोमीटर दूर कोरबा के ग्राम कोरकोमा में मौजूद ये पेड़ को ग्रामीण के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है । कोरकोमा में एक ओर इस पेड़ की जड़ का प्राकृतिक जलस्रोत बह रहा है। वहीं आसपास के तालाब और कुएं सूख गए हैं। यह प्राकृतिक जलस्रोत करीब सौ साल पुराना है। लेकिन ऐसे हालातों में भी यहां पानी की धार कम नहीं होती।

लोगों ने इसे तुर्री पानी का नाम दिया है। गांव के राठिया मोहल्ले से निकली तुर्री जल धारा पर गांव के लगभग 6500 लोग निर्भर हैं। खास बात यह है कि पानी इतना शुद्ध है कि इसे बिना छाने या उबाले ही ग्रामीण पानी को पेयजल के रुप में उपयोग कर रहे हैं। गांव में ही रहने वाली 72 वर्षीय शोभाराम पटेल का कहना है कि वह बचपन से ही जल के स्रोत को देख रहे हैं। उनके पूर्वज भी इस स्रोत का इस्तेमाल करते थे।

बाकी समय में यूं ही व्यर्थ बह जाने वाले पानी का उपयोग करने के लिए जिला प्रशासन ने योजना बनाई है। नजदीक में ही स्टाप डैम का निर्माण किया जा रहा। इसके लिए 44.21 लाख का आवंटन जल संसाधन विभाग को किया गया है। स्टाप डैम का 90 फीसद से अधिक काम हो चुका है। इस बारिश में तुर्री पानी व बारिश के पानी से डैम का भराव होगा। इसके साथ ही कचांदी, ढेंगूरडीह, बुंदेली व कोरकोमा के करीब 817 एकड़ कृषि भूमि में सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी।

 

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