Navratri 2021, Day 5: स्कंदमाता की पूजा विधि, कथा, महत्व, मंत्र, यहां जानें

Publish Date: 09 Oct, 2021
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Navratri 2021, Day 5: नवरात्रि का नौ दिवसीय उत्सव देवी दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंद माता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री को समर्पित है। नवरात्रिके पाचवें दिन (10अक्टूबर) स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता की उपासना से श्रद्धालुओं की सभी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इस दिन लोग देवी को प्रसन्न करने के लिए सफेद रंग के वस्त्र पहनते हैं। रंग पवित्रता, शांति और ध्यान का प्रतीक है।

स्कंद माता की पूजा का महत्व

नवरात्रि का पांचवां दिन भगवान कार्तिकेय की मां स्कंद माता को समर्पित है। स्कंद युद्ध देवता कार्तिकेय का दूसरा नाम है और माता माता के लिए प्रयुक्त शब्द है। इसलिए देवी को स्कंद माता के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जब भक्त उनकी पूजा करते हैं तो उन्हें भगवान कार्तिकेय की भी कृपा प्राप्त होती है। ऐसा कहा जाता है कि यदि कोई शुद्ध मन से देवी की पूजा करता है, तो वह उन्हें शक्ति, खजाना, समृद्धि, ज्ञान और मोक्ष का आशीर्वाद देती है।

देवी स्कंद माता की चार भुजाएँ हैं, और वह एक सिंह की सवारी भी करती हैं। उनके एक हाथ में कमल और दूसरे में घंटी है। देवी का तीसरा हाथ हमेशा आशीर्वाद मुद्रा में होता हैऔर चौथे हाथ से वह स्कंद धारण करती हैं। उनकी पूजा पार्वती, माहेश्वरी, पद्मासनी या माता गौरी के रूप में भी की जाती है।

स्कंद माता की पूजा विधि

नवरात्रि के 5वें दिन भक्तों को स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। स्कंद माता की मूर्ति को घर के अंदर पूजा स्थल पर रखें और गंगाजल से शुद्ध करें। फिर एक कलश लेकर उसमें पानी और कुछ सिक्के डाल दें। देवी की पूजा करें और उन्हें केले का प्रसाद चढ़ाएं। पूजा के दौरान देवी को छह इलायची भी अर्पित की जाती हैं।

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