Nipah Virus In India: केरल में निपाह वायरस से मौत के बाद अलर्ट, जानिए कितना खतरनाक है ये वायरस

Publish Date: 06 Sep, 2021 |
 

 

Nipah Virus In India: कोरोना का कहरअभी कम नहीं हुआ है कि अब Nipah Virus का खतरा केरल में मंडरा रहा है। कोझिकोड से कुछ दूरी मावूर में एक 12 साल के बच्चे की निपाह वायरस से मौत हो गई है, जिसके बाद प्रशासन अलर्ट पर है। केंद्र की एक स्वास्थ्य टीम ने रविवार को केरल के कोझीकोड जिले का दौरा भी किया। सरकार के एक बयान के अनुसार, नमूना संक्रमण के स्रोत की पहचान करने में मदद कर सकता है और पुष्टि कर सकता है कि संक्रमण की उत्पत्ति का माध्यम क्या है।

Kerala में Coronavirus के बाद निपाह वायरस

बता दें कि केरल के कोझीकोड में निपाह वायरस ने 12 साल के एक लड़के की मौत हो गई है। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि शनिवार रात पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने संक्रमण की पुष्टि की। मंत्री ने कहा कि, "तीन नमूने-प्लाज्मासीएसएफ और सीरम- संक्रमित पाए गए। उन्हें चार दिन पहले तेज बुखार के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन शनिवार को उनकी हालत खराब हो गई। हमने कल से एक दिन पहले उनके नमूने परीक्षण के लिए भेजे थे।"

उन्होंने आगे कहा कि, "हमने निपाह वायरस के बारे में संबंधित अधिकारियों के साथ जिले के मंत्रियों के साथ बैठक की। स्थिति को संभालने के लिए एक टीम का गठन किया जाएगा। हमने संपर्क ट्रेसिंग उपायों की शुरुआत की है।"

Nipah Virus Symptoms क्या है?

  • डब्ल्यूएचओ के अनुसारनिपाह वायरस से संक्रमित व्यक्ति शुरू में बुखार, सिरदर्द, मायलगिया (मांसपेशियों में दर्द), उल्टी और गले में खराश जैसे लक्षण विकसित करता है, जिसके बाद चक्कर आना और एन्सेफलाइटिस हो सकता है।
  • वहीं कुछ लोगों को असामान्य निमोनिया और सांस की गंभीर समस्या का भी अनुभव हो सकता है।

 

Nipah virus Preventions क्या है?

  • डब्ल्यूएचओ के अनुसार, निपाह वायरस का संदेह है, तो जानवर के परिसर को तुरंत छोड़ दिया जाना चाहिए और जगह को अलग कर दिया जाना चाहिए।
  • कच्चे खजूर के रस या ताड़ी के सेवन से बचें। धुले हुए फल ही खाएं, जमीन के आधे सूखे मेवे खाने से बचें।
  • लोगों को संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए संक्रमित जानवरों को मारें। किसी विशेषज्ञ की देखरेख में जानवर के शवों को दफनाएं।
  • संक्रमित खेतों से जानवरों की आवाजाही को अन्य क्षेत्रों में प्रतिबंधित करने से बीमारियों के प्रसार को कम किया जा सकता है
 

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