Pravin Jadhav Biography: प्रवीण जाधव ने जमकर चलाए तीर, प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंचे

Publish Date: 28 Jul, 2021
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Pravin Jadhav Biography :  बुधवार को ओलंपिक से भारत के लिए अच्छी खबर सामने आई है।  भारतीय तीरंदाज प्रवीण जाधव (Pravin Jadhav) ने पुरुषों के व्यक्तिगत वर्ग मुकाबले में अच्छा प्रदर्शन करतेहुए अंतिम-16 में पहुंच गए हैं। उन्होंने रूस ओलंपिक समिति (ROC) के बजारजापोव गलसन को 6-0 से हरा दिया है। जाधव ने पहले सेट 29-27, दूसरा सेट 28-27 और तीसरा सेट 28-24 से जीता है। बता दें कि जाधव ने इस मुकाबले में चार बार 'परफेक्ट 10' जमाया। बता दें कि ओलंपिक में कोई भी भारतीय अभी तक प्री-क्वार्टर फाइनल को पार नहीं कर पाया है।

ओलंपिक में इस बार कई ऐसे चेहरे हैं जिन पर सबकी नजरें रहनेवाली है और उनमें से एक प्रवीण जाधव (Pravin Jadhav) जिनसे मेडल लाने की उम्मीद की जा रही है। Mens Archery team 9वें स्थान पर रही है। प्रवीण जाधव ने अपनी अधिकांश जिंदगी महाराष्‍ट्र के सरादे गांव में नाले के पास एक झोपड़े में बिताई। जाधव का बचपन का अधिकांश हिस्‍सा कठिनाइयों का सामना करते हुए ही निकाला है। आज से 10 साल पहले उन्हें आर्चरी का मतलब भी नहीं पता था और अब वो आर्चरी ओलंपिक खेल में भारत की तरफ से हिस्सा ले रहे हैं।

 

दिहाड़ी मजदूरी से तीरंदाजतक का सफर (Pravin Jadhav Personal Life & Family Background)

प्रवीण बेहद ही गरीब परिवार से आते हैं और उनके पिता रमेश एक कंस्‍ट्रक्‍शन साइट पर दिहाड़ी थे जबकि उनकी मां खेत में काम करती थीं। एक ऐसा भी समय था जब प्रवीण का परिवार दो वक्‍त के खाने के लिए भी संघर्ष कर रहा था, लेकिन अपनी मेहनत के दम पर प्रवीण जाधव ने आर्चरी में कई मेडल अपने नाम किए और अब 25 साल के प्रवीण जाधव ((Pravin Jadhav Age)  टोक्‍यो ओलंपिक्‍स में भारत का प्रतिनिधित्‍व करने जा रहे हैं। आपको बता दें कि प्रवीण पुरुषों की रिकर्व टीम में अतनु दास और तरुणदीप राय के साथ टीम में शामिल हैं और व्‍यक्तिगत स्‍पर्धा में भी भाग लेंगे।  प्रवीण ने एक इंटरव्यू में बताया था कि हमारी हालत तब बहुत बुरी थी। हम एक झोपड़ी में रहते थे। हमारे घर में बिजली नहीं थी और घर में पैसा भी नहीं था।

Pravin Jadhav Early Life

प्रवीण की जिंदगी में एक ऐसा भी समय आया था जब वो अपने पिता के साथ दिहाड़ी मजदूरी में काम करने वाले थे। घर का खर्च निकालने के लिए उनके पिता ने कहा कि वो पढ़ाई छोड़े और कंस्‍ट्रक्‍शन कंपनी में उनके साथ काम करें, तब प्रवीण सातवीं में पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन उनकी किस्‍मत में कुछ और लिखा था। प्रवीण की स्थिती के बारे में उनके स्कूल के पीटीआई को पता था। एक दिन प्रवीण ने स्कूल के खेल प्रशिक्षक विकास भुजबल अपनी प्रतिभा देखी और प्रवीण को एथलेटिक्स में लेने को कहा।

प्रवीण ने बताया कि, ''विकास सर ने मुझे दौड़ना शुरू करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि इससे जीवन बदलेगा और दिहाड़ी मजदूरी नहीं करनी पड़ेगी। मैने 400 से 800 मीटर दौड़ना शुरू किया। इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।''

 

Pravin Jadhav Career & Achievements

प्रवीणने अपने करियर की शुरूआत में धनुष के भार से निपटने के लिए काफी संघर्ष किया था क्योंकि उनका शरीर शारीरिक रूप से काफी कमजोर था और अक्सर उसके कंधों पर दर्द का अनुभव होता था। विकास भुजबल के अनुरोध पर सतारा जिला परिषद के शिक्षा अधिकारी ने प्रवीण को एक मौका दिया और उन्होंने अपनी योग्यता भी साबित की। प्रवीण ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाजी प्रतियोगिताओं भाग लिया और अच्छा प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रवीण ने पहली बार बैंकॉक में आयोजित एशियाई खेल समूह में भारत प्रतिनिधित्व किया था और रिकर्व पुरुष टीम में कांस्य जीतकर अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीता। उसी साल जाधव ने कोलंबिया के मेडेलिन में 2016 तीरंदाजी विश्व कप का प्रतिनिधित्व भी किया था। प्रवीण ने रिकर्व पुरुष टीम में 2019 विश्व तीरंदाजी चैंपियनशिप रजत पदक अपने नाम किया था। प्रवीण, अतनु दास और तरुणदीप की टीम ने 2005 के बाद से विश्व तीरंदाजी चैंपियनशिप के फाइनल में प्रतिस्पर्धा पहली भारतीय रिकर्व तीरंदाजी टीम भी बनी थी।

 

 

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