Elections 2022: चुनाव में कब होती है जमानत जब्त , क्या कहता है कानून?

Publish Date: 28 Jan, 2022 |
 

UP, Uttarakhand, Punjab, Goa, Manipur Elections 2022: Security Deposit (जमानत राशि) से जुड़े क्या हैं कानूनी प्रावधान

दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत के राज्यों में एक निश्चित समय जिसकी सीमा 5 वर्ष है,के अंतराल पर चुनाव प्रक्रिया को संपन्न कराया जाता रहा है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश में  कुल 7 चरणों में विधानसभा के चुनाव 10 फरबरी से प्रारंभ होने जा रहे हैं। परिणाम 10 मार्च को आएंगे।

क्या होती है जमानत राशि:

चुनाव के नतीजे जब घोषित होते हैं तब कौन जीता कौन हारा इसकी चर्चा चरम पर होती है। पर एक शब्द ऐसा भी है जो किसी उम्मीदवार की हार से जुड़ा होता है.वो शब्द है 'जमानत जब्त' होना। अब सवाल है कि इसका अर्थ क्या होता है।
जमानत जब्त होने को किसी चुनाव में उम्मीदवार के बुरी तरह हार से जोड़ कर देखा जाता है।
मसलन देश में चाहें लोकसभा, राज्य राज्यसभा या फिर पंचायत चुनाव हो जो भी इस चुनाव में उम्मीदवार के रूप में खड़े होते हैं या कहें पर्चा भरते हैं उन सभी को अपने कुछ जरूरी दस्तावेजों के साथ साथ एक निश्चित धनराशि चुनाव आयोग के पास जमानत के रूप में जमा करनी होती है। अंग्रेजी में इसे ' सिक्योरिटी डिपॉजिट इन इलेक्शन' कहते हैं, यानी जमानत राशि।

जमानत राशि जमा करने पर क्या कहता है कानून:

चुनाव का पर्चा भरते समय सभी प्रत्याशियों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 34 1(अ) के तहत
लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए 25 हजार और राज्य के विधानसभा चुनाव यानी विधायकी का चुनाव लड़ने के लिए 10 हज़ार रुपए की धनराशि चुनाव आयोग के पास जमा करनी होती है। जिसे जमानत राशि कहते है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 34 1 (ब) के तहत अनुसूचित (SC) जाति और अनुसूचित जनजाति(ST) के लिए यह राशि आधी होती है।

जमानत राशि जब्त करने का क्या है कानूनी प्रावधान:

जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 158 में चुनाव में प्रत्याशियों द्वारा जमा की गई जमानत राशि को चुनाव संपन्न होने के लौटाने के बारे में बताया गया है।
इसी में यह बताया गया है कि किसकी जमानत जब्त होगी।
नियम यह कहता है कि अगर किसी प्रत्याशी को किसी निर्वाचन क्षेत्र में डाले गए कुल वैध (सही) वोटों के 1/6 ( छटा हिस्सा) से कम वोट प्राप्त होते हैं तो उसकी जमानत राशि जब्त कर ली जायेगी। मतलब प्रत्याशी ने जो धनराशि चुनाव आयोग के पास जमा कराई थी वो उसे वापस नही मिलेगी।
अगर उम्मीदवार को निर्वाचन क्षेत्र में डाले गए कुल वैध मतों का 1/6 ही वोट मिलते है तो भी उसकी जमानत राशि जब्त हो जाती है।

जमानत राशि किन परिस्थितियों में वापस होती है:

1-या तो उम्मीदवार का नामांकन खारिज हो गया हो या फिर नामांकन स्वीकार हो जाने के बाद उम्मीदवार ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली हो।
2- मतदान से पहले उम्मीदवार की मृत्यु हो जाने की स्थिति में।
3- उम्मीदवार के चुनाव जीतने की स्थिति में।
4- निर्वाचन क्षेत्र में डाले गए वैध मतों के 1/6 हिस्से से अधिक वोट मिलने की स्थिति में।
5- अगर उम्मीदवार जीत जाता है लेकिन प्राप्त वोटों की संख्या निर्वाचन क्षेत्र में डाले गए कुल वैध मतों के 1/6 हिस्से से कम होते है तब भी उम्मीदवार की राशि वापस होती है।

 

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