Vehicle Scrappage Policy: कचरे से कंचन, विस्तार से जानें

Publish Date: 23 Aug, 2021 |
 

Vehicle Scrappage Policy: 

व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी को लेकर भारत में लंबे समय से चर्चा हो रही हैं और आम लोगों के साथ ऑटोमोबाइल कंपनियां भी इसी दिन के इंतजार में बैठी हुई थी। हाल ही में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पॉलिसी की शुरुआत की और कहा कि यह नीति भारत की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। ट्विटर पर पीएम मोदी ने लॉन्च के बारे में जानकारी दी साथ ही युवाओं और स्टार्ट-अप कंपनियों से इस कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह किया।


इस नीति का मुख्य कारण देश में 20 साल पुरानी कार आरै 15 वर्ष से अधिक पुराने कमर्शियल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का है। इसे सरकार द्वारा प्रदूषण के स्तर को कम करने और ऑटोमोटिव बिक्री को बढ़ावा देने के लिए लागू किया जा रहा है, जो भारत के बाद के COVID रिकवरी चरण के दौरान पीड़ित है। इसका मतलब है कि 20 साल से पुराने किसी भी निजी वाहन को फिटनेस टेस्ट से गुजरना होगा। वित्त मंत्री के अनुसार, फिटनेस परीक्षण स्वचालित फिटनेस केंद्रों पर आयोजित किया जाएगा, जो यह निर्धारित करेगा कि इस योजना के भीतर आने वाला वाहन सड़कों पर चलने के योग्य है या उसे स्क्रैप में भेजा जाएगा।


नए नीति दिशानिर्देशों के अनुसार, 20 साल की अवधि के बाद, एक वाहन को फिटनेस टेस्ट से गुजरना होगा। जैसा कि इस साल की शुरुआत में मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था, प्रत्येक फिटनेस परीक्षण पर लगभग 40,000 रुपये खर्च होंगे। यह रोड टैक्स, और संभावित "ग्रीन टैक्स" से अलग होगा। जो आपको 15 साल की अवधि के बाद अपने निजी वाहन के पंजीकरण को रिन्यू करते समय भुगतान करना होगा। बता दें, प्रत्येक फिटनेस सर्टिफिकेट पांच साल के लिए लागू होता है, जिसके बाद वाहन के मालिक को एक और फिटनेस टेस्ट करवाना होगा।

 

वहीं सरकार ने हरित कर का प्रस्ताव किया है, जिसके लिए आपको हर बार अपने फिटनेस प्रमाणपत्र को रिन्यू करने पर अपने रोड टैक्स का 10-25 प्रतिशत भुगतान करना होगा। इसका मतलब यह है कि, परीक्षण के लिए शुल्क देने के अलावा आपको अन्य कई प्रकार की राशि का भुगतान करना होगा। जो प्रदूषण के स्तर के आधार पर प्रत्येक शहर में अलग होगा। उदाहरण के लिए दिल्ली एनसीआर में ग्रीन टैक्स यदि लागू किया जाता है, तो ग्राहक को पंजीकरण के नवीनीकरण पर रोड टैक्स का 50 प्रतिशत भुगतान करना होगा।


 

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