Baba ka Dhaba: ढाबे वाले बाबा के सुख के दिन अब हुए खत्म, बंद हुआ रेस्टोरेंट, वापस लौटे अपने ढाबे पर

Publish Date: 09 Jun, 2021
PTI Baba ka Dhaba: ढाबे वाले बाबा के सुख के दिन अब हुए खत्म, बंद हुआ रेस्टोरेंट, वापस लौटे अपने ढाबे पर

Baba ka Dhaba:

पिछले साल की रातों रात सफलता में से एक बाबा का ढाबा याद है? खैर 6 महीने तक की मशहूर और गौरव के बाद, बूढ़ा जोड़ा अपने शुरुआती दिनों में वापस आ गया है क्योंकि वे दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में अपने सड़क किनारे भोजनालय में ग्राहकों का अब बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। 

 

पिछले साल, एक YouTuber ने कांता प्रसाद और उनकी पत्नी बादामी देवी का एक वीडियो साझा किया, जो अपने सड़क किनारे भोजनालय में गुजारा करने के लिए काफी मशक्कत कर रहे थे। उनका वो वीडियो वायरल हो गया और बाबा का ढाबा रातों रात सफल हो गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने भोजनालय के बाहर अपना खाना खरीदने, सेल्फी क्लिक करने और पैसे दान करने के लिए बड़ी लाइनें लगाईं थी। फूड डिलीवरी सर्विसेज और रेस्टोरेंट फाइंडर Zomato ने भी अपनी वेबसाइट पर इस रेस्टोरेंट को लिस्ट किया है। जिसके बाद प्रसाद ने एक नया रेस्तरां खोला था और अपने सभी कर्जों को निपटाने और अपने और अपने परिवार के लिए स्मार्टफोन भी खरीदा था। हालांकि, रेस्तरां असफल रहा और फरवरी में बंद हो गया, जिससे वह और उसकी पत्नी एक बार फिर अपने सड़क किनारे स्टाल पर लौट आए हैं। लेकिन जगह-जगह तालाबंदी के कारण, भोजनालय ग्राहकों को खोजने के लिए मेहनत कर रहा है। 

 

5 लाख का निवेश कर खोला था रेस्टोरेंट 

प्रसाद ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया है कि, “हमारे ढाबे पर चल रहे कोविड लॉकडाउन के कारण रोजाना के लोगों की संख्या में गिरावट आई है, और हमारी हर रोज की बिक्री लॉकडाउन से पहले 3,500 रुपये से घटकर अब 1,000 रुपये हो गई है। हमारे आठ लोगों के परिवार के लिए आय पर्याप्त नहीं है।"

 

पिछले साल की सफलता के बाद, प्रसाद ने नया रेस्तरां खोलने के लिए 5 लाख रुपये का निवेश किया और तीन कर्मचारियों को काम पर रखा था। सफलता की एक संक्षिप्त अवधि के बाद, फुटफॉल काफी कम हो गया और प्रसाद को इसे बंद करना पड़ा। उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स को आगे बताया कि, “औसत मासिक बिक्री कभी भी 40,000 रुपये से अधिक नहीं हुई। सारा नुकसान मुझे उठाना पड़ा। अंत में, मुझे लगता है कि हमें एक नया रेस्तरां खोलने की गलत सलाह दी गई थी। रेस्तरां बंद होने के बाद, ₹5 लाख के कुल निवेश में से, हम कुर्सियों, बर्तनों और खाना पकाने की मशीनों की बिक्री से केवल ₹36,000 की वसूली ही कर पाए थे।" 

 
 

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