Chhath Puja Kharna 2020: छठ पर्व का दूसरा दिन होता है Kharna, जानें इसका महत्व, पूजा विधि, सामग्री- Watch Video

Publish Date: 19 Nov, 2020 |
 

Chhath Puja Kharna 2020: छठ महापर्व में पहला दिन नहाय-खाय होता है। उसके बाद दूसरा दिन खरना किया जाता है। हिन्दू पंचाग के मुताबिक, छठ पूजा का खरना कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। बता दें खरना को लोहंडा भी कहते हैं। इसका छठ पर्व में विशेष महत्व होता है। खरना के दिन छठ पर्व के लिए विशेष प्रकार का प्रसाद बनाया जाता है। खरना के दिन पूरे दिन का व्रत रखा जाता है और रात प्रसाद स्वरूप गुड़ की खीर का ग्रहण किया जाता है। चलिए जानते हैं कि इसका क्या महत्व है?


छठ पूजा: 20 नवंबर 2020

नहाय-खाय: 18 नवंबर 2020

छठ पूजा का दूसरा दिन: खरना

 

क्या है खरना

छठ पर्व का व्रत रखने वाला लोग खरना के पूरे दिन व्रत रखते हैं। उसके बाद रात को गुड़ से बनी खीर खाते हैं और इसके बाद सूर्योदय को अर्घ्य देकर पारण करने तक ना कुछ खाता है और न ही जल ही ग्रहण करते हैं। खरना एक तरह से शारीरिक और मानसिक शुद्धि की प्रक्रिया होती है। खरने में रात में भोजन करने के बाद अगले 36 घंटे का कठिन व्रत रखा जाता है।

खरना के दिन छठ पूजा का प्रसाद

खरना के दिन ही छठ पर्व का प्रसाद बनाया जाता है। इस प्रसाद में गुड़ और चावल की खीर बनाई जाती है, साथ ही पूड़ियां, खजूर, ठेकुआ आदि भी बनाया जाता है। पूजा करने के लिए फल और कुछ सब्जियों का भी इस्तेमाल किया जाता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति इस प्रसाद को छठी मैया को अर्पित करते हैं। खरना के दिन प्रसाद ग्रहण करके ही इस व्रत का प्रारंभ होता है। छठ पूजा का प्रसाद बनाते समय इस बात का खास ध्यान रखना होता है कि चूल्हे में आग के लिए केवल आम की लकड़ियों का ही प्रयोग किया जाए। बता दें कि खरना के बाद अगले दिन संध्या का सूर्य देवता अर्घ्य तथा उसके अगले दिन सूर्योदय का अर्घ्य बेहद महत्वपूर्ण होता है।



 

 

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