Deep ocean mission: जानें भारत का 'डीप ओशन मिशन' क्या है?- Watch Video

Publish Date: 30 Nov, 2020 |
 

Deep ocean mission: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार भारत जल्द ही एक महत्वाकांक्षी 'डीप ओशन मिशन' की शुरुआत करने वाला है, जो सागरों, महासागरों के जल के नीचे की दुनिया के खनिज, ऊर्जा और समुद्री विविधता की खोज करेगा या जानकारी प्राप्त करेगा, जिसका एक बड़ा भाग अभी भी अस्पष्टीकृत है और इसके बारे में व्यापक शोध और अध्ययन किया जाना अभी बाकी है. इस मिशन की लागत, 4,000 करोड़ से अधिक है. यह मिशन भारत के विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) और महाद्वीपीय शेल्फ (Continental Shelf) का पता लगाने के प्रयासों को बढ़ावा देगा. मंत्रालय के सचिव एम राजीवन (M Rajeevan) ने कहा कि "भविष्यवादी और खेल-परिवर्तन" (F uturistic and Game-Changing) मिशन के लिए आवश्यक अनुमोदन प्राप्त किए जा रहे हैं, और यह अगले 3-4 महीनों में शुरू होने की संभावना है.

 

'डीप ओशन मिशन' के बारे में 

नोडल एजेंसी: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES)

इस मिशन के प्रमुख घटक अंडरवाटर रोबोटिक्स (Underwater robotics) और 'मानवयुक्त' सबमर्सिबलस' (manned submersibles) हैं. ये विभिन्न संसाधनों जैसे जल, खनिज और ऊर्जा का सीबेड और गहरे पानी से दोहन में भारत की मदद करेंगे.

मिशन में किये जाने वाले कार्यों में गहरे समुद्र में खनन (deep-sea mining), सर्वेक्षण, ऊर्जा स्रोतों की खोज इत्यादि शामिल हैं.

 

हितधारकों के रूप में अन्य विभाग

MoES  इस मिशन की गतिविधि को बढ़ावा देगा. यह मिशन वास्तव में एक बहु-अनुशासनात्मक अभ्यास है और इसमें अन्य सरकारी विभागों जैसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO), वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) शामिल होंगे. यह एक गहन वैज्ञानिक गतिविधि है और इसमें शामिल कुछ प्रौद्योगिकियां ISRO और DRDO जैसे संगठनों द्वारा विकसित किये जाएंगी.

मिशन का उद्देश्य 

ऐसा माना जाता है कि यह खोजपूर्ण अभ्यास:

- भारत के विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र और महाद्वीपीय शेल्फ का पता लगाने के प्रयासों को बढ़ावा देगा.

- मानव सबमर्सिबल (Human Submersibles) के डिजाइन, विकास और प्रदर्शन को बढ़ावा मिलेगा.

- गहरे समुद्र में खनन और आवश्यक प्रौद्योगिकियों के विकास की संभावना का पता लगाने में मदद करेगा.

- हिंद महासागर में भारत की उपस्थिति बढ़ाएगा.

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि चीन, कोरिया और जर्मनी जैसे अन्य देश भी इस गतिविधि में हिंद महासागर क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले हफ्ते, चीन ने मारियाना ट्रेंच के तल पर खड़ी अपनी नई मानव-निर्मित सबमर्सिबल की फुटेज को लाइव-स्ट्रीम किया था. यह ग्रह पर सबसे गहरी पानी के नीचे घाटी में इस मिशन का हिस्सा था.

भारत इस मिशन से किस भौगोलिक क्षेत्र का पता लगा सकता है?

सितंबर 2016 में, भारत ने हिंद महासागर में पॉली-मेटैलिक सल्फाइड (Poly-Metallic Sulphides, PMS) की खोज के लिए अंतर्राष्ट्रीय सीबेड अथॉरिटी (International Seabed Authority, ISA) के साथ 15 साल का अनुबंध किया था.

ISA एक स्वायत्त अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र के अभिसमय (United Nations Convention on the Law of the Sea) के तहत स्थापित किया गया था. यह संगठन गहरे समुद्र में खनन के लिये 'क्षेत्रों' को आवंटित करता है.

हिंद महासागर में आवंटित क्षेत्र में PMS की खोज के लिए, 15 साल के अनुबंध ने भारत के विशेष अधिकारों को औपचारिक रूप दिया.

ISA ने पहले भारतीय महासागर के मध्य भारतीय रिज (Central Indian Ridge, CIR) और दक्षिण-पश्चिम भारतीय रिज (Southwest Indian Ridge, SWIR) क्षेत्र के  15 साल के PMS अन्वेषण योजना के साथ भारत के लिए 10,000 वर्ग किमी को मंजूरी दी थी.

 

 

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