Diwali 2020: दीवाली पर इतने साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि – Watch Video

Publish Date: 14 Nov, 2020 |
 

Diwali 2020: आद पूरे देश में दिवाली का पर्व मनाया जा रहा है। दिवाली रोशनी का त्यौहार है। इस दिन को अंधकार पर प्रकाश की जीत या फिर बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। यह पांच दिवसीय त्योहार है और त्योहार धनतेरस से शुरू होते हैं, इसके बाद छोटी दिवाली, दिवाली, भाई दूज और गोवर्धन पूजा होती है। इस बार दिवाली पर बहुत ही उत्तम योग बन रहा है। इस दिवाली पर सर्वार्थसिद्धियोग के साथ ग्रहों की स्थिति उत्तम मानी जाही है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इससे पहले ग्रहों की ऐसी स्थिती 499 साल पहले यानी की 1521 में थी। कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली पूजन का विधान है। इस दिन प्रभु श्री राम की अयोध्या वापसी पर लोगों ने उनका स्वागत घी के दिये जलाकर किया था। अमावस्या की काली रात दीयों की रौशनी से रोशन हो गयी थी । अंधेरा मिट गया उजाला हो गया । अज्ञानता के अंधकार को समाप्त कर ज्ञान का प्रकाश हर ओर फैलने लगा। इसलिये दिवाली को प्रकाशोत्सव भी कहा जाता है। दिवाली के दिन भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। दिवाली से पहले पूरे घर की अच्छी तरह से सफाई की जाती है और शाम के समय गणेश जी और लक्ष्मी जी का पूजन करके पूरे घर को दीपों से सजाकर माता लक्ष्मी की स्वागत किया जाता है। दिवाली को दीपों का त्योहार कहा जाता है। दिवाली से पहले करवा चौथ, गौत्सव, धनतेरस, नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली और फिर दिवाली का पर्व आता है। दिवाली के एक दिन बाद गोवर्धन पूजा, अन्नकूट महोत्सव, भाई दूज और विश्वकर्मा पूजा की जाती है। दीपावली (Deepawali) हर भारतीय परिवार में मनाई जाती है। दिवाली का त्यौहार जब आता है तो साथ में अनेक त्यौहार लेकर आता है।  हिन्दुओं का सबसे बड़ा दिवाली का पर्व पूरे विश्व में पांच दिन तक मनाया जाता है। दीपदान, धनतेरस, गोवर्धन पूजा, भैया दूज आदि त्यौहार दिवाली  के साथ-साथ ही मनाये जाते हैं। सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक हर लिहाज से दिवाली बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है। वर्तमान में तो इस त्यौहार ने धार्मिक भेदभाव को भी भुला दिया है और सभी धर्मों के लोग इसे अपने-अपने तरीके से मनाने लगे हैं। हालांकि पूरी दुनिया में दिवाली से मिलते जुलते त्यौहार अलग-अलग नामों से मनाये जाते हैं लेकिन भारतवर्ष में विशेषकर हिंदूओं में दिवाली (Dewali )  का त्यौहार बहुत मायने रखता है। एक और यह जीवन में ज्ञान रुपी प्रकाश को लाने वाला है तो वहीं सुख-समृद्धि (Sukh -Samridhi) की कामना के लिये भी दिवाली (Dewali) से बढ़कर कोई त्यौहार नहीं होता इसलिये इस अवसर पर लक्ष्मी की पूजा (Laxmi Ki Puja )भी की जाती है। माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिये दिवाली  का दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

प्रदोष काल मुहूर्त: यह मुहूर्त 17:28 से शुरू होकर 19:24 बजे समाप्त होगा।

सुभ मुहूर्त: यह मुहूर्त 17:28 से शुरू होकर 20:07 बजे समाप्त होगा

दिवाली की पूजा विधि (Diwali Pujan Vidhi)

दिवाली (Diwali) के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी जी (Bhagavaan Ganesh aur Maata Lakshmee jee) की पूजा की जाती है। दिवाली (Diwali) के दिन घर के सभी लोगो को शाम के समय नए कपडे पहनने चाहिए । इसके बाद एक चौकी पर गंगाजल (Gangajal) छिड़कर उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। कपड़ा बिछाने के बाद खील और बताशों की ढेरी लगाकर उस पर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी (Bhagavaan Ganesh, Maa Lakshmee) की प्रतिमा और कुबेर जी (Kubera ji) की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद कुबेर जी प्रतिमा भी स्थापित करें और साथ ही कलश की स्थापना भी करें । उस पर स्वास्तिक बनाकर आम के पत्ते रखें और नारियल स्थापित करें। 6.कलश स्थापित करने के बाद पंच मेवा, गुड़ फूल , मिठाई,घी , कमल का फूल ,खील और बातसे भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के आगे रखें। 7. इसके बाद अपने घर के पैसों, गहनों और बहीखातों आदि को भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के आगे रखें। 8.यह सभी चीजें रखने के बाद घी और तेल के दीपक जलाएं और विधिवत भगवान गणेश और माता लक्ष्मी जी की पूजा करें। 9.माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप और साथ ही श्री सूक्त का भी पाठ करें। 10.पूजा समाप्त होने के बाद अंत में अपने घर के मुख्य द्वार पर तेल के दो दीपक अवश्य जलाएं और साथ ही अपनी तिजोरी पर भी एक दीया अवश्य रखें।

दीपावली पूजन सामग्री

महालक्ष्मी पूजन में केसर, रोली, चावल, सुपारी, फल, फूल, दूध, पान का पत्ता, खील, बतासे, दही गंगाजल धूप, सिन्दूर, सूखे मेवे, मिठाई, अगरबत्ती दीपक रुई, कलावा, नारियल और कलश के लिए एक ताम्बे का पात्र चाहिए।

 

दिवाली की पौराणिक कथा

हिंदू धर्म में हर त्यौहार से कई धार्मिक मान्यता और कहानियां जुड़ी हुई हैं। दिवाली को लेकर भी दो अहम पौराणिक कथाएं प्रचलित है।

 

कार्तिक अमावस्या के दिन भगवान श्री राम चंद्र जी चौदह वर्ष का वनवास काटकर और लंकापति रावण का नाश करके अयोध्या लौटे थे। इस दिन भगवान श्री राम चंद्र जी के अयोध्या आगमन की खुशी पर लोगों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था। तभी से दिवाली की शुरुआत हुई।

 

Related videos

यह भी पढ़ें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept