Eid al-Adha 2020: बक़रीद पर COVID-19 की मार, खरीददार हुए कम, व्यापारी परेशान- Watch Video

Publish Date: 30 Jul, 2020
 
Eid al-Adha 2020: देश में कोरोना वायरस ने सभी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसका सीधा असर त्योहारों पर देखने को मिल रहा है। 1 अगस्त को भारत में बक़रीद मनाई जाएगी। बकरीद मुसलमानों के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। जो मीठी ईद के करीब 2 महीने बाद आता है। बकरीद को ईद-उल-अजहा के नाम से भी जाना जाता है। इस समय बकरों की बिक्री रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। कारोबारियों को बकरों के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। कुछ लोग बकरे खरीद भी रहे हैं तो आधी कीमत भी मुश्किल से दे रहे हैं। कारोबारियों में मायूसी का माहौल इसलिए बना है क्योंकि इस बार न सिर्फ पिछले साल के सापेक्ष सिर्फ तीस प्रतिशत ही बकरों की बिक्री होने की उम्मीद है बल्कि मुनाफा भी नहीं हो सकेगा। चलिए आपको इस पर्व का महत्व बताते हैं। मुसलमान यह त्यौहार कुर्बानी के पर्व के तौर पर मनाते हैं। इस दिन लोग नमाज अदा करने के बाद बकरे की कुर्बानी देते हैं। इस्लामिक धार्मिक मान्यताओं अनुसार पैगंबर हजरत इब्राहिम से ही कुर्बानी देने की परंपरा शुरु हुई थी। कहा जाता है कि इब्राहिम अलैय सलाम की कोई औलाद नहीं थी। उन्हें कई मिन्नतों के बाद पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम उन्होंने इस्माइल रखा। इब्राहिम अपने बेटे इस्माइल से बेहद प्यार करते थे। एक रात अल्लाह ने इब्राहिम के सपने में आकर उनसे उसकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांगी। इब्राहिम ने अल्लाह के आदेश को मानते हुए अपने सभी प्यारे जानवरों की कुर्बानी एक-एक कर दे दी। लेकिन इसके बाद एक बार फिर अल्लाह इब्राहिम के सपने में आए और फिर से सबसे प्यारी चीज को कुर्बान करने के लिए कहा। इब्राहिम अपने बेटे इस्माइल से बेहद प्यार करते थे। लेकिन अल्लाह के आदेश का पालन करने के लिए वह अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गया। इब्राहिम जब कुर्बानी दे रहा था तो इस दौरान उसने अपने आंखों पर पट्टी बांध ली। कुर्बानी देने के बाद जब इब्राहिम ने अपने आंखें खोली तो उन्होंने देखा कि उनका बेटा तो जिन्दा था। यह सब देखकर इब्राहिम बहुत खुश हुआ। ऐसी मान्यता है कि अल्लाह ने उसकी निष्ठा देख उसके बेटे की जगह कुर्बानी को बकरे से बदल दिया। तब से ही बकरीद त्योहार पर बकरे की कुर्बानी देने की परंपरा शुरु हुई और चली आ रही है।
 

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