Farmers Protest: मोदी सरकार ने कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक रोकने का प्रस्ताव रखा, किसान नेताओं ने प्रस्‍ताव ठुकराया

Publish Date: 20 Jan, 2021 |
Farmers Protest: मोदी सरकार ने कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक रोकने का प्रस्ताव रखा, किसान नेताओं ने प्रस्‍ताव ठुकराया

 Farmers Protest: नए कृषि कानून के खिलाफ किसानों के आंदोलन को आज 56 दिन हो गए है। कड़ाके की इस ठंड में किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक कानूनों को वापस नहीं लिया जाता है वो दिल्ली की सीमा से हटने वाले नहीं है। मोदी सरकार और किसानों के बीच आज 10वें दौर की बातचीत बेनतीजा खत्म हुई है। पहले यह वार्ता मंगलवार को होनी थी, लेकिन फिर इसे टाल दिया गया। जिसके बाद आज वार्ता 2 बजे के करीब शुरू हुई। बैठक खत्म होने के बाद बाहर निकल कर किसान नेता ने कहा कि, सरकार ने कहा है कि वह डेढ़ साल के लिए कानूनों को निलंबित करने के लिए तैयार है। वहीं किसानों ने कहा कि कानूनों को निलंबित करने का कोई मतलब नहीं है। हम इन कानूनों को निरस्त करना चाहते हैं।

सूत्रों के अनुसार, मोदी सरकार की तरफ से नई कमेटी के गठन का प्रस्ताव भी किसानों ने ठुकरा दिया है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इस कमेटी को गठन करे का प्रस्‍ताव दिया था। जिसमें सरकार और किसान के सदस्य होंगे। ये कमेटी क्‍लाज वाइज कानूनों पर चर्चा करेगी। मिली जानकारी के अनुसार, किसानों ने ये प्रस्ताव ठुकराया दिया है। बता दें कि अदालत ने पहले ही 2 महीने के लिए खेत कानूनों पर रोक लगा दी है।

वहीं गणतंत्र दिवस पर किसानों के ट्रैक्टर मार्च निकालने  के खिलाफ दायर याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। केंद्र सरकार ने इस ट्रैक्टर रैली निकालने पर रोक की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने आज ये साफ कर दिया है कि वो इस मामले में कोई दखल नहीं देगा। कोर्ट ने इस याचिका को वापस लेने के लिए भी कहा। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिकाओं को वापस ले लिया।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हमने आपको बताया है कि हम इसमें कोई निर्देश जारी नहीं करेंगे। यह पुलिस का मामला है। हम आपको अपनी याचिका वापिस लेने की अनुमति देते हैं। आपको इससे निपटना होगा। आपके पास आदेश पारित करने की शक्तियां हैं। आदेश पारित करना अदालत के लिए नहीं है।” वहीं कमेटी के दोबारा गठन को लेकर महापंचायत द्वारा दायर याचिका पर कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। पहले बनाई गई कमेटी के चार सदस्यों में से एक ने खुद को अलग कर लिया है। इस मामले पर सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस ए बोबडे, जस्टिए एएस बोपन्ना और  वी रामसुब्रहमण्यम कर रहे हैं।

 

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