Emergency के दौरान 18 महीने Uttar Pradesh की जेल में रहे Champat Rai की कहानी | Ram Temple Trust

Publish Date: 21 Feb, 2020

VHP के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष Champat Rai Supreme Court में चली Ram Temple के मुकदमे की सुनवाई में VHP की ओर से मुख्य पैरोकार एवं पक्षकार रहे. Ram Janam bhoomi के पक्ष में महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने और Supreme Court में इन्हें प्रस्तुत करने में उनकी अहम भूमिका रही. माना जा रहा है कि उन्हें इसी मेहनत और लगन का इनाम मिला है. नगीना के सरायमीर मोहल्ले में रामेश्वर प्रसाद बंसल के परिवार में 1946 में जन्मे चंपत राय बंसल बचपन में ही RSS से जुड़ गए. युवावस्था में ही आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए. पढ़ाई में तेज-तर्रार रहे, लिहाजा धामपुर के RSM Degree College में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर नियुक्त हो गए. उनके चचेरे भाई Hitesh Bansal बताते हैं कि 1977 में इमरजेंसी के दौरान पुलिस ने चंपतराय को कॉलेज से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. वह करीब 18 माह प्रदेश की विभिन्न जेलों में रहे. जेल से छूटने के बाद वह घर नहीं लौटे. 1980 में विहिप में शामिल हुए. विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष Ashok Singhal के काफी नजदीकी रहे. राय की देखरेख में श्रीराम मंदिर आंदोलन भी चला. निचली कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में चली सुनवाई में विहिप की ओर से चंपत राय मुख्य पैरोकार एवं पक्षकार रहे. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वह नियमित न्यायालय में मौजूद रहते थे. अपने भाइयों में दूसरे नंबर के चंपत राय अविवाहित हैं. वह किसी खास कार्यक्रम में ही Nageena पहुंच पाते हैं.

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