Loan Moratorium Case: क्या है लोन मोरेटोरियम केस, SC ने केंद्र को क्या आदेश दिए- Watch Video

Publish Date: 15 Oct, 2020
 

 

Loan Moratorium Case: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ऋण स्थगन मामले में एक नया हलफनामा दायर किया और उच्चतम न्यायालय को बताया कि यह कोरोनवायरस वायरस की महामारी से प्रभावित क्षेत्रों के लिए अधिक समय नहीं दे सकता है। हलफनामे में, आरबीआई ने यह भी कहा कि छह महीने से अधिक की अवधि को रोकना संभव नहीं है। आरबीआई ने इसका कारण बताते हुए कहा कि समय सीमा पार करने से समग्र ऋण अनुशासन प्रभावित हो सकता है क्योंकि यह अर्थव्यवस्था में ऋण निर्माण की प्रक्रिया को व्यापक रूप से प्रभावित कर सकता है और उधारकर्ताओं के क्रेडिट व्यवहार को भी प्रभावित कर सकता है और निर्धारित भुगतानों के फिर से शुरू होने के जोखिमों को बढ़ा सकता है।  इसी कड़ी में केंद्र ने सर्कुलर जारी करने के लिए 15 नवंबर तक का वक्त मांगा। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार 15 नवंबर तक इससे जुड़ा सर्कुलर जारी कर देगी। इसे ठुकराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को 2 नवंबर तक सर्कुलर जारी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि जब फैसला हो चुका है तो उसे लागू करने में इतना समय क्यों लगना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को ब्‍याज पर ब्‍याज माफी स्‍कीम को जल्‍द से जल्‍द लागू करना चाहिए। इसके लिए केंद्र को एक महीने का वक्त क्यों चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही कहा कि अगर सरकार इस पर फैसला ले लेगी तो हम तुरंत आदेश पारित कर देंगे। इस पर सॉलीसीटर जनरल ने कहा कि सभी लोन अलग-अलग तरीके से दिए गए हैं। इसलिए सभी से अलग-अलग तरीके से निपटना होगा। फिर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि ब्याज पर ब्याज माफी स्‍कीम को लेकर 2 नवंबर तक सर्कुलर लाया जाए। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार 2 नवंबर तक ब्‍याज पर ब्‍याज माफी स्‍कीम को लेकर सर्कुलर जारी कर देगी। आपको बता दे कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने पूरे देश में लॉकडाउन लगाया था। उस समय उद्योग धंधे पूरी तरह बंद थे। इसीलिए कारोबारियों और कंपनियों के लिए कई मुश्किलें खड़ी हो गई। कई लोगों की नौकरियां चली गईं। ऐसे में लोन की किस्तें चुकाना मुश्किल था। ऐसे में रिजर्व बैंक ने लोन मोरेटोरियम की सहूलियत दी थी। यानी लोन पर किस्तें टाल दी गई थीं। किसी लोन पर मोरेटोरियम का लाभ लेते हुए किस्त नहीं चुकाई तो उस अवधि का ब्याज मूलधन में जुड़ जाएगा। यानी अब मूलधन+ब्याज पर ब्याज लगेगा। इसी ब्याज पर ब्याज का मसला सुप्रीम कोर्ट में है। 

 

 

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