J&K: रिहाई के बाद Mehbooba Mufti बयान-'नहीं भूले काले दिन के काले फैसले की बेइज्जती’- Watch Video

Publish Date: 14 Oct, 2020
 

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने करीब सवा साल की नजरबंदी के बाद रिहा करने का ऐलान कर दिया है। बीते साल 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाए जाने से पहले केंद्र सरकार ने उन्हें हिरासत में ले लिया था और तब से वह अपने आवास में ही नजरबंद थीं। आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर से 5 अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 के प्रावधानों को हटाने के साथ ही महबूबा मुफ्ती को पीएसए के तहत हिरासत में ले लिया गया था। तबसे अब तक उनकी हिरासत की अवधि लगातार बढ़ाई जा रही थी। आखिरकार 14 महीने और आठ दिन बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने उन्हें रिहा करने का फैसला किया है। जम्मू-कश्मीर के प्रमुख सचिव सूचना रोहित कंसल ने इसकी जानकारी दी। इंतेजामिया ने महबूबा मुफ्ती को 436 दिन बाद रिहा किया है। रिहाई के बाद महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा ने उनके ही ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर मुश्किल वक़्त में साथ देने वालों को शुक्रिया अदा किया है। गौरतलब है कि पिछले साल मोदी सरकार ने संविधान से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और जम्मू-कश्मीर को विभाजित कर केंद्र शासित प्रदेश बनाने के पहले राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत तमाम प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया था। इनमें महबूबा मुफ्ती के साथ पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला के साथ कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज का नाम भी शामिल है। इनमें से फारुख और उमर अब्दुल्ला को पहले ही रिहा किया जा चुका है। वहीं महबूबा मुफ्ती की हिरासत अवधि लगातार बढ़ाई जा रही थी, जो अब खत्म हो गई है। आपको बता दें कि महबूबा मुफ्ती ने एक ऑडियो संदेश जारी कर आर्टिकल 370 (Article 370) के प्रावधानों को हटाए जाने को काला फैसला करार दिया और कहा कि कश्मीर का संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने अपने टि्वटर पर पोस्ट किये गए ऑडियो संदेश में कहा, ‘मैं आज एक साल से भी ज्यादा समय के बाद रिहा हुई हूं। 5 अगस्त 2019 के उस काले दिन का काला फैसला मेरे दिल और रूह पर हर पल वार करता रहा। मुझे यकीन है कि ऐसी ही स्थिति जम्मू-कश्मीर के लोगों की रही होगी। कोई भी उस दिन की बेइज्जती को भूल नहीं सकता।’ महबूबा मुफ्ती ने केंद्र पर निशाना साधते हुए आगे कहा, ‘दिल्ली दरबार ने गैर कानूनी, गैर लोकतांत्रिक तरीके से हमसे छीन लिया, उसे वापस लेना होगा। साथ ही कश्मीर के मसले को हल करने के लिए जद्दोजहद जारी रखनी होगी। इसके लिए हजारों लोगों ने अपनी जानें न्योछावर की। यह रास्ता आसान नहीं है, मुझे यकीन है कि हौसले से यह दुश्वार रास्ता भी तय होगा। महबूबा ने इसके अलावा केंद्र के सामने मांग रखी कि जम्मू कश्मीर के जितने भी लोग देश की जेलों में बंद हैं, उन्हें जल्द से जल्द रिहा किया जाए।’  




 

 

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