Shardiya Navratri 2020: नवरात्रि के 9 दिन, जानें किस दिन किस रूप में पूजी जाती है दुर्गे – Watch Video

Publish Date: 19 Oct, 2020
 

 

Shardiya Navratri 2020: नवरात्रि का पवित्र पर्व 17 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। नवरात्रि 9 दिनों तक मनाया जाता है। इन 9 दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग अवतारों की पूरे मन से पूजा की जाती है। नवरात्रि के शुभ दिनों पर मां की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। एक वर्ष में चार प्रकार के नवरात्रि पड़ते हैं, जैसे, माघ नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि, आषाढ़ नवरात्रि और शरद नवरात्रि। शरद या शारदीय नवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण है। शरद नवरात्रि का प्रत्येक दिन बहुत महत्व रखता है और कल (20 Oct 2020)  शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा देवी की पूजा का विधान है। मां कुष्मांडा देवी को अष्‍टभुजाओं वाली देवी भी कहा जाता है। माना जाता है कि देवी दुर्गा के इस अवतार ने ब्रह्मांड को अपनी मुस्कुराहट के साथ बनाया है। जिसने अविश्वसनीय ऊर्जा प्राप्त की। भक्त मोक्ष प्राप्त करने के लिए मां कुष्मांडा से प्रार्थना करते हैं। मां कुष्मांडा की भुजाओं में बाण, चक्र, गदा, अमृत कलश, कमल और कमंडल सजे हैं। मां कुष्मांडा देवी की आराधना करने से भक्‍तों के समस्‍त रोग नष्‍ट हो जाते हैं। मान्यता के अनुसार, पूजा करते समय देवी कुष्मांडा को चावल, फूल और मिठाई अर्पित की जाती है।

 

मां कूष्मांडा पूजा विधि

मां कूष्मांडा की पूजा कपने लिए सबसे पहले आप सुबह जल्दी उठते हैं और स्नान करते हैं। उसके बाद, वे देवी कूष्मांडा की पूजा करते हैं और देवी को फूल और विशेष भोजन अर्पित करते हैं। पूजा करने के बाद, मां कूष्मांडा को अर्पित की गई मिठाई अपने भक्तों को प्रसाद के रूप में दी जाती है। लोग उसे दूध, नारियल और विभिन्न प्रकार की मिठाइयाँ भी भेंट करते हैं। इस वर्ष, माँ कुष्मांडा की पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 6:15 बजे से सुबह 8:17 बजे तक है।

 

मां ​कूष्मांडा की आरती


कूष्मांडा जय जग सुखदानी।

मुझ पर दया करो महारानी॥

पिगंला ज्वालामुखी निराली।

शाकंबरी मां भोली भाली॥

लाखों नाम निराले तेरे।

भक्त कई मतवाले तेरे॥

भीमा पर्वत पर है डेरा।

स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥

सबकी सुनती हो जगदम्बे।

सुख पहुंचती हो मां अम्बे॥

तेरे दर्शन का मैं प्यासा।

पूर्ण कर दो मेरी आशा॥

मां के मन में ममता भारी।

क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥

तेरे दर पर किया है डेरा।

दूर करो मां संकट मेरा॥

मेरे कारज पूरे कर दो।

मेरे तुम भंडारे भर दो॥

तेरा दास तुझे ही ध्याए।

भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥

 

 

 

 

 

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