Sirpur: Ravan की Lanka के वास्तुशास्त्र से जुड़ी है इस मंदिर की कहानी|Chhattisgarh

Publish Date: 09 Dec, 2019
 
राजधानी Raipur से करीब 90 किलोमीटर दूर स्थित प्राचीन शहर Sirpur में एक मंदिर ऐसा है जिसे लेकर इतिहासकारों का दावा है कि इसका निर्मांण परलोक से मिले वास्तुशिल्प ज्ञान के आधार पर हुआ है। सातवीं सदी का यह Temple हाल ही में खुदाई में बाहर आया है। Surangtila नाम से पहचाने जाने वाले इस Temple कॉम्प्लेक्स की वास्तुकला किसी को भी आश्चर्य में डाल सकती है। पंचायतन शैली के इस विशाल मंदिर का निर्मांण बड़े-बड़े पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर रख कर किया गया है और इन पत्थरों की जोड़ाई प्राचीन आयुर्वेदिक निर्मांण पद्धती से तैसार मसाले से की गई है। इस मंदिर के निर्मांण के लिए जो तकनीक अपनाई गई थी वह प्राचीन वास्तुशास्त्री मयासूर की लिखी पुस्तक मयमतम् पर आधारित मानी जाती है। मयासूर, रावण के ससुर थे और उनके वास्तु शास्त्र के आधार पर ही Lanka नगरी सहित कई प्राचीन शहरों का निर्मांण हुआ था।छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी महानदी के तट पर इशान कोण में स्थापित सुरंग टीला मंदिर का निर्मांण सातवीं सताब्दी में सोमवंशीय राजा महाशिवगुप्त बालार्जुन ने कराया था। इस मंदिर के निर्मांण के लिए विशाल पत्थरों और आयुर्वेदिक गारे का उपयोग किया गया है।
 
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept